Bhagavad Gita केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए शाश्वत मार्गदर्शक है।
यह वही दिव्य ज्ञान है जो महाभारत युद्ध के आरंभ से पहले कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को प्रदान किया।
हर वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को Gita Jayanti मनाई जाती है, जो Bhagavad Gita Ka Janm दिवस के रूप में जानी जाती है।
इसी अवसर पर हम आपको ले चलते हैं उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल पर—ज्योतिसर (Jyotisar), हरियाणा।
गीता जयंती का पावन दिन | Gita Jayanti 2026 Significance
1 December 2026, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी और प्रातः 11 बजे,
वह पावन समय जब Bhagavad Gita का दिव्य उपदेश आरंभ हुआ।
मान्यता है कि इसी तिथि और समय पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म, धर्म, भक्ति और ज्ञान का उपदेश दिया।
इसलिए Gita Jayanti केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दिन है।
द्वापर युग और युद्ध की पृष्ठभूमि | War Situation in Dwapar Yug
महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था।
एक ओर पांडवों की सेना, दूसरी ओर कौरवों की विशाल सेना।
रणभूमि में शंखनाद हो चुका था, अस्त्र-शस्त्र तैयार थे।
लेकिन इसी युद्धभूमि में Bhagavad Gita का जन्म हुआ—
जहाँ हिंसा के बीच अहिंसा का ज्ञान दिया गया।
अर्जुन का मोह और द्वंद्व | Arjuna’s Dilemma

जब अर्जुन ने सामने अपने ही गुरु, भाई, मित्र और स्वजन देखे,
तो उनका मन विचलित हो गया।
उन्होंने कहा:
“मैं अपने ही लोगों को मारकर विजय नहीं चाहता।”
यही क्षण था, जब Bhagavad Gita का बीज अंकुरित हुआ।
श्रीकृष्ण का प्रथम उपदेश | Birth of Bhagavad Gita
अर्जुन के प्रश्नों का उत्तर देते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा:
“उठो अर्जुन, यह तुम्हारा धर्म है।”
यहीं से Bhagavad Gita का आरंभ हुआ।
कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक, जो जीवन के हर पहलू को छूते हैं।
गीता का मूल संदेश है:
- आत्मा अमर है
- कर्म करना ही धर्म है
- फल की चिंता त्यागो
ज्योतिसर का ऐतिहासिक महत्व | Importance of Jyotisar, Haryana
Jyotisar वह स्थान माना जाता है जहाँ श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह दिव्य उपदेश दिया।
यहाँ स्थित प्राचीन वटवृक्ष (बरगद का पेड़) को उसी काल से जोड़ा जाता है।
आज भी इस स्थान पर अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा अनुभव की जाती है।
यह कुरुक्षेत्र का हृदय है—जहाँ Bhagavad Gita जीवंत होती है।
700 श्लोकों का सार | Essence of Bhagavad Gita
Bhagavad Gita के 700 श्लोक जीवन दर्शन का सार हैं:
🔹 कर्मयोग
कर्तव्य करो, फल ईश्वर पर छोड़ दो।
🔹 ज्ञानयोग
आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है।
🔹 भक्तियोग
ईश्वर से प्रेम और समर्पण ही मोक्ष का मार्ग है।
इसीलिए Bhagavad Gita को हर युग का ग्रंथ कहा जाता है।
विराट रूप का दर्शन | Vishwaroop Darshan

जब अर्जुन ने श्रीकृष्ण से उनका वास्तविक स्वरूप देखने की इच्छा की,
तो भगवान ने उन्हें विराट रूप दिखाया।
उस रूप में—
- संपूर्ण ब्रह्मांड
- काल, सृष्टि और संहार
सब एक साथ दिखाई दिए।
यह Bhagavad Gita का सबसे रहस्यमय और शक्तिशाली अध्याय है।
गीता का शाश्वत संदेश | Eternal Message of Gita
Bhagavad Gita हमें सिखाती है:
- कठिन समय में भी कर्तव्य न छोड़ें
- भय और मोह से ऊपर उठें
- आत्मविश्वास और विवेक बनाए रखें
“उठो, जागो और अपने धर्म पर अडिग रहो” — यही गीता का सार है।
कुरुक्षेत्र का आध्यात्मिक अनुभव | Spiritual Experience of Kurukshetra
आज भी कुरुक्षेत्र और Jyotisar में
भक्तों को ऐसा अनुभव होता है मानो
गीता के श्लोक हवा में गूंज रहे हों।
यह भूमि केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत सनातन चेतना है।
Sanatan Tourist के साथ गीता यात्रा | Gita Journey with Sanatan Tourist
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धर्म, ज्ञान और तीर्थ की सच्ची भावना से।
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जहाँ Sanatan Sanskriti आज भी सांस लेती है।
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निष्कर्ष | Conclusion
Bhagavad Gita का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं,
बल्कि मानवता के लिए दिव्य उपहार है।
जब भी जीवन में भ्रम, डर या द्वंद्व हो—
गीता का स्मरण मार्ग दिखाता है।
जय श्रीकृष्ण | जय गीता माता







