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दीपावली क्यों मनाई जाती है? दीपावली का त्योहार हिन्दु धर्म में मनाये जाने वाले त्योहारों में से एक है। जो देश भर में सबसे बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। सनातन धर्म को मानने वाले इस त्योहार को बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। दीपावली का त्योहार मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई, अज्ञान पर ज्ञान और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास में पड़ने वाली अमावस्या के दिन मनाया जाता है।
इस त्योहार से बहुत दिन पहले से ही लोग अपने घरों में साफ़ सफाई, पुताई आदि करते हैं और दीपावली के दिन लोग अपने घरों में दीये जलाकर तथा मिठाइयाँ बांटकर खुशियाँ मनाते हैं।
दीपावली क्यों मनाई जाती है?
दीपावली क्यों मनाई जाती है? दीपावली मनाने के पीछे कई मुख्य कारण बताये जाते हैं आइये एक- एक करके जानते हैं:
दीपावली क्यों मनाई जाती है?
1. श्री राम चंद्र की अयोध्या में वापसी:सबसे मुख्य कारण पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम चंद्र, माता सीता और अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ लंका के राजा रावण को युद्ध में परास्त कर उसका वध करके और 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापिस लौटे थे। अयोध्यावासियों ने उनके सम्मान में पूरी नगरी को दीयों से रोशन कर दिया था।
तभी से इस दिन को दीपावली के त्योहार के रूप में पूरे भारत भर में बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है इसके अलावा जो भारतीय लोग दूसरे देशों में जा कर बस गए हैं वे भी इस त्योहार को बड़ी धूम- धाम से मानते हैं और वहाँ के लोगों के साथ अपनी खुशियाँ साझा करते हैं।
2. देवी लक्ष्मी और गणेश की पूजा: इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। इनके साथ- साथ लोग कुबेर महाराज जिन्हें धन के देवता कहा जाता है की भी पूजा करते हैं जिससे उनके घर में धन सम्पदा की बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य का आगमन होता है। कुबेर महाराज उनके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होने देते हैं।
3. नरकासुर का वध: एक पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, प्रजा उसके अत्याचारों से बहुत परेशान थी। कृष्ण भगवान ने प्रजा को नरकासुर राक्षस से मुक्ति दिलाई थी तभी से इस ख़ुशी को एक दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इसलिए छोटी दीवाली को नर्क चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
4. महाभारत काल की कथा के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या की रात को ही पांचों पांडव भाई अपनी पत्नी द्रौपदी और माता कुंती के साथ 12 वर्ष का वनवास बिता कर हस्तिनापुर वापिस लौटे थे। इस ख़ुशी को उन्होंने पूरे हस्तिनापुर शहर को मिट्टी के दीयों से रोशन करके मनाया था। उनकी वापसी की खुशी में दिए जलाने की परंपरा दिवाली के त्योहार में बदल गयी।
5. जब देवताओं और राक्षसों के द्वारा समुद्र मंथन हुआ था तब उसमें से लक्ष्मी माता पुनर्जन्म के रूप में उत्पन्न हुई थी, उनके पुनर्जन्म पर दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हो गयी।
6. एक और मान्यता के अनुसार, दीपावली की रात को ही माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुनकर उनसे विवाह किया था। इसी खुशी को दिवाली के रूप में मनाया गया।
दीपावली पर लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के उपाय
दीपावली क्यों मनाई जाती है?- दीपावली के त्योहार को माता लक्ष्मी से भी जोड़कर देखा जाता है इसलिए दीपावली से बहुत दिन पहले से ही लोग माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अपने घरों की स्वच्छता व साज सज्जा का विशेष ध्यान रखते हैं। इसके लिए वे घर की संपूर्ण सफाई, मुख्य द्वार से लेकर पूरे घर को सजाना और विधिपूर्वक लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं। जिससे उन्हें धन और सुख समृद्धि प्राप्त हो।
इसके लिए नीचे कुछ विशेष विधान बताये गए हैं आप उन्हें अपनाकर अपने जीवन में सुख समृद्धि ला सकते हैं और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
घर की स्वच्छता और साज सज्जा:
दीपावली क्यों मनाई जाती है? कहते हैं कि माता लक्ष्मी को साफ-सफाई बहुत प्रिय है। इसके लिए दीपावली से पहले घर के कोने – कोने को साफ़ करें। घर में लम्बे समय से ख़राब पड़े सामान को हटा दें और नई चीज़ों से घर को सजायें। घर में हरे भरे पौधे लगायें और बिजली की झालर से घर को जगमगायें इससे घर की सुंदरता में चार चाँद लग जायेंगे।
1. घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं और ‘शुभ-लाभ’ लिखें।
2. आम या अशोक के पत्तों का तोरण द्वार मुख्य द्वार पर अवश्य लगाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
3. बाजार में मुख्य द्वार पर सजाने के लिए कई प्रकार के तोरण द्वार बने हुए भी मिलते हैं उनका प्रयोग करके घर की सुंदरता को भी बढ़ाया जा सकता है।
पूजा के अचूक उपाय:
दीपक जलाना: दीपावली पूजा में माता लक्ष्मी के सीधे हाथ की तरफ एक घी का और उल्टे हाथ की तरफ एक तेल का दीपक (लंबी बाती वाला) पूरी रात जलाएं।
- कमल गट्टा: माता लक्ष्मी को कमल का फूल बहुत प्रिय है। यदि आपको कमल का फूल न मिले तो कमल गट्टे (कमल के बीज) माता को अर्पित करें उसके बाद अपनी तिजोरी में रखें।
- चांदी का सिक्का: दीपावली पूजा में चांदी के सिक्के का भी बहुत महत्व है। एक चाँदी का सिक्का या उसके स्थान पर 1 ₹ का सिक्का गंगाजल से शुद्ध करके रखें। इसे बाद में लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में बरकत आती है।
मंत्र जाप:
दीपावली पूजा के दौरान माता लक्ष्मी के बीज मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए इससे आपकी मनोकामना पूरी होती है और लक्ष्मी माता सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
माता लक्ष्मी के बीज मंत्र-
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः
माता लक्ष्मी के प्रिय भोग:
माता लक्ष्मी को मखाने, सिंघाड़े, खीर या सफेद मिठाई का भोग अवश्य लगाएं उसके बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटें।
दान- पुण्य:
दीपावली के दिन गरीब लोगों, जरूरतमंदों या गौशाला में अन्न और वस्त्र जैसे कम्बल इत्यादि का दान करें, इससे मां लक्ष्मी अत्यधिक प्रसन्न होती हैं।
भगवद गीता भी दीपावली के बारे में एक सन्देश देती है।
भगवद् गीता हमें बाहरी रिवाजों से हटकर आंतरिक परिवर्तन की ओर बढ़ने का उपदेश देती है। दिवाली केवल बाहरी दीये जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की शाश्वत लौ जलाने का पर्वहै ।
दिवाली पर हम भगवान राम की पूजा क्यों नहीं करते?
जब भगवान राम 14 वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या वापिस लौटे थे, तब उन्होंने सबसे पहले भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा की थी। तभी से दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा शुरू हो गयी। और उसके बाद ये परंपरा दीपावली की रात होने वाली माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के रूप में एक धार्मिक रिवाज में बदल गई, जिसे “दिवाली पूजा” कहा जाता है। इसलिए दीपावली का यह त्योहार लक्ष्मी और गणेश भगवान की पूजा के बिना अधूरा ही माना जाता है।
दीपावली का महत्व
दीपावली क्यों मनाई जाती है? दीपावली के त्योहार को पंचदिवसीय त्योहार के रूप में मनाने की परंपरा देवी देवताओं के समय से चली आ रही है। यह त्योहार धन सम्पदा, सुख, समृद्धि में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार को लोग पूरे परिवार के साथ मिलकर मानते हैं जिससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है नौकरी पेशा लोग दूर दराज़ से अपने घर लौटते हैं ताकि वे परिवार के साथ मिलकर त्योहार मना सकें और अपनों के साथ खुशियाँ बाँट सकें।
यह पांच दिनों तक चलने वाला आध्यात्मिक त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। इन पांचों दिनों का अलग महत्व और कारण हैं।
धनतेरस का त्योहार –
दीपावली क्यों मनाई जाती है? पंचदिवसीय त्योहार का यह पहला दिन धनतेरस कहलाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। यह दिन धन, वैभव और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन और वाहन तथा अन्य वस्तुएं खरीदना पसंद करते है जो कि अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा लोग घरों को फूल मालाओं और दीप जलाकर सजाते है इस तरह माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
नरक चतुर्दशी –
दीपावली क्यों मनाई जाती है? धनतेरस के अगले दिन छोटी दीपावली मनाई जाती है इसी को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसलिए इस दिन को पाप और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन प्रातःकाल उठकर लोग स्नान आदि करके शुभ कार्यों की शुरुआत करते हैं तथा संध्या काल में 5 दीये जलाते हैं।
दीपावली –
दीपावली क्यों मनाई जाती है? पंचदिवसीय त्योहार के तीसरे दिन को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। क्योंकि इस दिन को ही दीपावली पर्व के रूप में मनाते हैं यह दिन अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसी दिन भगवान श्रीराम सीता जी और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर पूरे नगर को रोशनी से सजाया था।
दीपावली क्यों मनाई जाती है? इस दिन भगवान श्रीराम ने सीता जी और भाई लक्ष्मण के साथ माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा थी। तभी से इस दिन को दीपावली के रूप में मनाते हैं इस दिन लोग अपने घरों को दीपों और फूलों से सजाते हैं तथा घर के द्वार पर अंदर की तरफ माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए रंगोली भी बनायी जाती है और परिवार के सभी लोग मिलकर इस उत्सव को मनाते हैं तथा एक दूसरे को मिठाई और उपहार भी भेंट करते हैं।
गोवर्धन पूजा –
दीपावली क्यों मनाई जाती है? चौथे दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक ऊँगली पर उठाकर इंद्र देव के अभिमान को समाप्त किया था और इस तरह उन्होंने ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इस दिन लोग गोबर से श्री कृष्ण की आकृति और उनकी ऊँगली पर गोवर्धन पर्वत बनाते हैं और उनकी पूजा और परिक्रमा करते हैं तथा विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करते हैं।
भाई दूज –
दीपावली क्यों मनाई जाती है? पंचदिवसीय त्योहार के अंतिम दिन को भाई दूज के रूप में मानते हैं। यह दिन भाई और बहन के अटूट प्रेम तथा स्नेह को समर्पित है। बहनें इस दिन अपने भाइयों के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाकर उनके लिए सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, उन्हें नारियल और मिठाई देती हैं। इसके बदले भाई अपनी बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें उपहार भी भेंट करते हैं।
निष्कर्ष
दीपावली क्यों मनाई जाती है? दीपावली के ये पांचों दिन अपने आप में बेहद खास होते हैं क्योंकि ये अच्छे स्वास्थ्य, सुख समृद्धि, प्रकृति के सम्मान और पारिवारिक रिश्तों में मिठास का संदेश देते हैं। इसलिए दीपावली न केवल रोशनी का एक पर्व है बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति, भगवान के प्रति हमारी आस्था और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत उत्सव है।











